चार से छह फंक्शन वाली भारतीय शादी में वेडिंग प्लानर लग्ज़री नहीं रह जाता, यह एक असली जरूरत बन जाता है। सवाल यह नहीं कि प्लानर चाहिए या नहीं, सवाल यह है कि कितनी मदद चाहिए।
तीन तरह की सर्विस लेवल
- सिर्फ डे-ऑफ कोऑर्डिनेशन: लगभग 50 हजार से 1.5 लाख रुपये, प्लानर आखिरी हफ्तों में जुड़ता है और सिर्फ फंक्शन के दिन की व्यवस्था संभालता है
- पार्शियल प्लानिंग: लगभग 1.5 से 4 लाख रुपये, जब कुछ वेंडर पहले से बुक हों और बाकी में मदद चाहिए
- फुल प्लानिंग: कुल बजट का 10 से 15 प्रतिशत, शुरू से आखिर तक हर फंक्शन की पूरी जिम्मेदारी
कीमत क्यों जायज़ है
एक अच्छे वेडिंग प्लानर के पास पहले से वेंडर नेटवर्क होता है, जिससे बुकिंग तेज़ होती है और गलत वेंडर चुनने का रिस्क कम हो जाता है। वो उन लॉजिस्टिक परेशानियों को पहले से जानता है जो ज्यादातर परिवार सिर्फ अनुभव से सीखते हैं।
अच्छे प्लानर की पहचान
- वो प्रपोज़ल देने से पहले आपके परिवार और बजट के बारे में ढेर सारे सवाल पूछता है
- उसके पास आपकी शादी जैसे साइज़ और स्टाइल की असली उदाहरण होती हैं
- वो हर पैकेज में क्या शामिल है, साफ-साफ बताता है, बिना किसी छिपी शर्त के
कब वेडिंग प्लानर सबसे ज्यादा फर्क डालता है
ज्यादा मेहमान, कई शहर से आने वाले परिवार, या डेस्टिनेशन वेडिंग में प्लानर की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस होती है। इन्वेस्टमेंट अक्सर पैसे से ज्यादा तनाव बचाने में वसूल हो जाता है।
अच्छा वेडिंग प्लानर अपनी सोच परिवार पर थोपता नहीं, वो परिवार के विज़न को उस अनुभव के साथ आगे बढ़ाता है जो परिवार के पास खुद नहीं होता।
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