गेस्ट लिस्ट भारतीय शादी में शायद सबसे ज्यादा पारिवारिक बहस की वजह बनती है, क्योंकि हर किसी की अपनी अलग राय होती है कि कौन "जरूर" आना चाहिए। यहां है इसे बिना तनाव के सुलझाने का तरीका।
पहले टोटल नंबर तय करें
वेन्यू और बजट के हिसाब से पहले टोटल मेहमानों की संख्या फिक्स करें, फिर उसे परिवार के हिसाब से बांटें। संख्या पहले तय किए बिना नाम-दर-नाम लिस्ट बनाना कभी खत्म नहीं होता।
दोनों परिवार के बीच बंटवारा
- टोटल संख्या को दोनों परिवार के बीच पहले से तय अनुपात में बांट दें
- हर परिवार को अपनी सीमा के अंदर अपनी लिस्ट खुद बनाने दें
- अगर कोई परिवार बजट में योगदान दे रहा है, तो उनकी राय को उसी अनुपात में जगह दें
फंक्शन के हिसाब से अलग लिस्ट बनाएं
हर फंक्शन में सारे मेहमानों का होना जरूरी नहीं। मेहंदी और हल्दी अक्सर करीबी परिवार तक सीमित रखी जाती है, जबकि शादी और रिसेप्शन में बड़ी लिस्ट बुलाई जाती है। इससे छोटे फंक्शन का बजट और जगह दोनों बचते हैं।
प्लस वन और बच्चों की पॉलिसी
जो भी तय करें, उसे पूरी लिस्ट में एक जैसा लागू करें। कुछ मेहमानों के लिए अपवाद बनाना ही सबसे ज्यादा नाराज़गी की वजह बनता है। इनविटेशन पर ही साफ लिख दें ताकि किसी को पूछना न पड़े।
RSVP और ड्रॉपआउट का हिसाब रखें
भारतीय शादियों में औसतन 10 से 15 प्रतिशत मेहमान RSVP करने के बाद भी नहीं आते। कैटरिंग की फाइनल गिनती देने से पहले इस मार्जिन का ध्यान रखें।
सबसे अच्छी गेस्ट लिस्ट सबसे लंबी नहीं होती। सबसे अच्छी वो है जो आपके बजट और आपके फंक्शन दोनों में आराम से फिट बैठे।
Vowlio पर अपने मेहमानों और उनके RSVP को सीधे अपने डैशबोर्ड में ट्रैक करें।
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